‘The E-Myth Revisited’ Book Summary in Hindi By Michael Gerber

'The E-Myth Revisited' Book Summary in Hindi

‘The E-Myth Revisited’ Book Summary : मैकडोनाल्ड का बर्गर अब किसी भी सिटी या कंट्री में जाके खाए उसका टेस्ट आपको सेम मिलेगा। रीजन है उनके बर्गर बनाने के सिस्टम का। उनके बर्गर बनने के पूरे प्रोसेस को छोटे छोटे स्टेप्स में डिवाइड किया गया है। उनके लिए भी वो स्टेप्स प्रॉपरली फॉलो करते हैं जिससे बर्गर का टेस्ट हर जगह से मिलता है। ईजी टू फॉलो प्रोसेस होने के कारण अलग अलग जगह उनकी अलग अलग कर्मचारी से बर्गर बनने के बाद भी उनकी क्वालिटी में जरा भी फर्क नहीं होता।

How to be a Successful Entrepreneur

लोग मानते हैं कि बिजनेस सिर्फ एंटरप्रेन्योर स्टार्ट करते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। असल में जो लोग बिजनेस स्टार्ट करते हैं वह पहले किसी और के लिए काम कर रहे होते हैं और जब उनपर इंटरप्रेन्योर बनने का भूत सवार होता है तब अपना खुद का बिजनेस स्टार्ट करते हैं और थोड़े ही सालों में उनका सो कॉल्ड बिजनेस फेल हो जाता है लेकिन ऐसा क्यों होता है। चलिए थोड़ा डिटेल में समझते हैं।

जैक एक रेस्टोरेंट में पिज्जा बनाने का काम करता था। एक दिन उसने सोचा कि दूसरे लोगों के काम में इतनी मेहनत करने के बावजूद भी मुझे कुछ नहीं मिलता तो क्यों न मैं खुद का ही एक पिज्जा रेस्टोरेंट खोलू। जहा में लोगों को इससे भी सस्ते और अच्छी क्वॉलिटी के पिज्जा बनाकर बेचू। फिर उसने जॉब छोड़ दी और लोन लेकर अपना खुद का एक रेस्टोरेंट खोला।

स्टार्टिंग में वहां कुछ गिने चुने ही लोग आते थे। फिर जैकको रियलाइज हुआ कि उसे अपने रेस्टोरेंट की थोड़ी मार्केटिंग करनी होगी। सो उसने मार्केटिंग भी स्टार्ट किया। अब अच्छी क्वॉलिटी मार्केटिंग और सस्ते पिज्जा होने के कारण उसके रेस्टोरेंट पर ट्रैफिक होने लगा और चेक का बिजनेस थोड़ा प्रॉफिट में चलने लगा।

लेकिन जैसे ही रेस्टोरेंट में ज्यादा लोग आने लगे रेस्टोरेंट की साफ सफाई एकाउंटिंग मार्केटिंग ये सब काम जेक अकेले नहीं कर पा रहा था क्योंकि उसका ज्यादातर टाइम पिज्जा बनाने में ही निकल जाता था।

इसीलिए उसने एक आदमी को जॉब पर रखा। लेकिन चीजें सही होने की बजाय कॉम्प्लिकेटेड हो गई क्योंकि उसने जिस आदमी को हायर किया था वो काफी लेजी था और ढंग से काम भी नहीं करता था। जिससे लोगों की कंप्लेन बढ़ने लगी। जेक को लगा कि ये काम मुझसे अच्छा कोई नहीं कर सकता। और जैक ने उस काम वाले को ने को निकाल लिया और वापस सारे काम खुद हैंडल करने लगा।

लेकिन थोड़े ही टाइम में उन्हें समझ आया कि उसे कोई महंगे और एक्सपर्ट इंसान को काम पर रखना चाहिए। फिरसे उसने थोड़े महंगे आदमी को जॉब पे रखा जो फाइनली एक अच्छा वर्कर निकला। लेकिन फिर कुछ ही महीनों में उसने एक और आदमी को हायर किया पर क्यों कि उसका बिजनेस पहले से थोड़ा बड़ा हो गया था। इसलिए एम्प्लॉयी की सैलरी दुकान का रेंट लोन का ईएमआई फर्नीचर डेकोरेशन जैसे अलग अलग खर्चों से वह प्रॉफिट की बजाय लॉस में जाने लगा था और आखिर में उनको रेस्टोरेंट का बिजनेस बंद ही करना पड़ा।

यह फेलियर हुआ क्योंकि जैक ने अपनी टेक्निकल स्किल के बारे में ही सोचा कि वो टेस्टी पिज्जा बना सकता है तो वो उसका बिजनेस भी अच्छे से चला लेगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इसीलिए माइकल गर्बर कहते हैं कि एक अच्छा बिजनेस चलाना और एक टेक्नीशियन होना इन दोनों में जमीन आसमान का फर्क होता है।

जब आइबीएम के फाउंडर थॉमस वॉटसन को इंटरव्यू में एक बार पूछा गया कि उनका बिजनेस इतना सक्सेसफुल क्यों है तब थॉमस वॉटसन ने भी कहा कि किसी भी काम के टेक्निकल पार्ट को जानना और उसका बिजनेस रन करना काफी अलग है।

ज्यादातर लोग अपना बिजनेस सिर्फ इसीलिए स्टार्ट करते हैं क्योंकि उसे उस बिजनेस की टेक्निकल चीजों का नॉलेज होता है। लोग मानते हैं कि अगर उन्हें कोई टेक्निकल काम आता है तो उस काम से रिलेटेड बिजनेस भी वह आसानी से कर लेंगे जो सच नहीं होता।

Entrepreneur, Manager and Technician

माइकल गर्ग कहते हैं कि किसी भी बिजनेस को सक्सेसफुल बनाने के लिए उसमें तीन लोगों का होना बहुत जरूरी है। एक Entrepreneur, Manager and Technician। एंटरप्रेन्योर वो होता है जो फ्यूचर में जीता है जो नए नए आइडियाज लाकर कंपनी को विजन देता है। मैनेजर एक प्रैक्टिकल पर्सन होता है जो past के एक्सपीरिएंस से बिजनेस को ऑर्गनाइज्ड रखता है। वो एंप्लॉयी से लेकर कस्टमर्स और प्रॉडक्ट मैन्युफैक्चरिंग से लेकर प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूशन तक सब चीजों को हैंडल करता है और एक टेक्निशियन वो होता है जो प्रेजेंट में रहकर बिजनेस का टेक्निकल काम करता है। यानी वो आइडियाज को प्रैक्टिकल शेप देता है।

एक सक्सेसफुल बिजनेस चलाने के लिए ये तीन लोगों की जरूरत होती है। या एक ऐसा पर्सन चाहिए जिसमें ये तीनों क्वॉलिटीज हों लेकिन जैक की तरह कई लोग फेल होते हैं क्योंकि उस 70 % टेक्निशियन 20% मैनेजर परफेक्ट 10% ही entrepreneur होते हैं। जबकि स्ट्रॉन्ग ब्रांड इमेज क्रिएट करने के लिए आपमें तीनों को क्वालिटी बैलेंस्ड होनी चाहिए।

The E-Myth Revisited: 3 stages of Business

इसलिए अगर आपको कोई टेक्निकल काम करना अच्छे से आता है तो इसका मतलब यह हरगिज़ नहीं कि आप उसका बिजनेस भी अच्छे से कर सकते हों। The E-Myth Revisited के ऑथर के मुताबिक कोई भी बड़े बिजनेस की लाइफ साइकल तीन हिस्सों में डिवाइड की जा सकती है।

Infacy Stage

नंबर वन Infacy stage मतलब बिजनेस का बचपन। इस स्टेज में चपरासी से लेकर मालिक तक के सारे काम बिजनेस ओनर खुद करता है। जब बिजनेस expand होता है ज्यादा कस्टमर्स आने लगते हैं तो वो सब काम को उतना इंपॉर्टेंस नहीं दे पाता जितना वो पहले देता था। अगर वो एक काम पर ज्यादा वक्त लगाता तो दूसरे काम अधूरे रह जाते जिससे कस्टमर सैटिस्फैक्शन कम होने लगता।

फॉर एग्जाम्पल आप हेयर स्टाइलिस्ट हो तो स्टार्टिंग में जब कस्टमर्स कम थे तब आप सब मैनेज कर लेते थे। लेकिन जब कस्टमर्स बढ़ने लगे तब आप एक कस्टमर की हेयर स्टाइल बना रहे तो दूसरे कस्टमर को अच्छे से मैनेज नहीं कर पाते या सोप की साफ सफाई का खयाल नहीं रख पाते। अगर इन कामों को अब ज्यादा इंपोर्टेंस देते हैं तो क्वॉलिटी ऑफ वर्क में फर्क पड़ने लगता है पर कस्टमर्स शिकायत करने लगते हैं।

Adolescence Stage

अब अगर यहां पर बिजनेस ओनर को समझ में आ जाए कि में यह सब काम अकेले नहीं कर सकता मुझे और लोगों की हेल्प लेनी चाहिए तब उनका बिजनेस दूसरे स्टेज यानी की Adolescence stage पे आता है जिसमें बिजनेस ग्रो होने लगता है और मालिक सारे काम खुद नहीं कर पाता। तब वो दूसरे लोगों को जॉब पे रखना स्टार्ट करता है।

Adolescence stage स्टेज में बिज़नेस का मालिक अपने बहुत सारे काम आउटसोर्स कर देता है। जो हमेशा सही डिसिजन नहीं होता क्योंकि कुछ कस्टमर्स की तरफ से शिकायत भी आती है कि अब उनको उस स्टैंडर्ड का प्रोडक्ट नहीं मिलता जैसा उन्हें पहले मिलता था। ऐसे में अगर वे बिजनेस ओनर सोचे कि मेरे अलावा ये काम कोई नहीं कर पाएगा और वो अपने इंप्लाई को हटा के खुद काम करने लगे तो उनका बिजनेस वापस पहले स्टेज में चला जाता है।

Maturity Stage

लेकिन जो बिजनेसमैन अच्छी मैनेजमेंट के जरिए Adolescence stage को पार कर लेता है वो आता है Maturity stage पर जो किसी भी बिजनेस का हाइएस्ट लेवल होता है जिसमें ओनर के बिना भी बिजनेस चलता है। इस लेवल पर अब बिजनेस को ग्रो करने के लिए ओनर के निरंतर एफर्ट्स की जरूरत नहीं रहती। जिससे वो बिजनेस ओनर चाहे उतने लंबे वेकेशन पे जाके अपनी लाइफ एंजॉय कर सकता है।

लेकिन अपने बिजनेस को इस लेवल पर लाने के लिए आपको दो रूल्स फॉलो करना बहुत जरूरी है।

Create System dependent business not people dependent

नंबर वन क्रिएट सिस्टम डिपेंडेंट बिजनेस नॉट पीपल दीपेंडेंट। मैकडोनाल्ड का बर्गर अब किसी भी सिटी या कंट्री में जाके खाए उसका टेस्ट आपको सेम मिलेगा। रीजन है उनके बर्गर बनाने के सिस्टम का। उनके बर्गर बनाने के पूरे प्रोसेस को छोटे छोटे स्टेप्स में डिवाइड किया गया है। उनके एम्प्लॉयी भी कुछ स्टेप्स प्रॉपरली फॉलो करते हैं जिससे बर्गर का टेस्ट हर जगह सेम मिलता है। ईजी टू फॉलो प्रोसेस होने के कारण अलग अलग जगह उनकी अलग अलग एम्प्लॉयी से बर्गर बनने के बाद भी उनकी क्वॉलिटी में जरा भी फर्क नहीं होता।

अगर आपका बिजनेस पीपल डिपेंडेंट होगा तो आप तो जानते ही हैं कि लोग अपनी मर्जी पर अपने मूड के हिसाब से काम करते हैं। अगर वो लोग छोड़ के चले जाते हैं या वो ठीक से काम नहीं करते तो आपका पूरा बिजनेस खराब हो जाता है। इसीलिए आपका बिजनेस पीपल डिपेंडेंट नहीं बल्कि सिस्टम डिपेंडेंट होना चाहिए। जिसमें क्लियर कट स्टैंडर्ड और प्रोसेस का चेकलिस्ट हो।

जैसे मैकडोनाल्ड के पास बर्गर बनाने की पूरी स्टेप बाई स्टेप प्रोसेस, रेसिपीज, स्टोर की डिजाइन जैसी कई चीजों का एक प्री डिफाइन चेकलिस्ट है। मैकडोनाल्ड किसी भी शेफ के चले जाने से बंद नहीं होने वाला क्योंकि उनकी रेसिपी को कोई भी कॉलेज स्टूडेंट आसानी से सीखकर कुछ ही दिनों में वहां काम करना स्टार्ट कर सकता है।

मैकडोनाल्ड और स्टारबक्स ने ये बात पहले से ही समझ ली थी कि किसी भी बिजनेस में सिस्टम का होना कितना इंपॉर्टेंट होता है जिसकी वजह से आज वर्ल्ड वाइड मैकडोनल्ड की 39000 और स्टारबक्स के 32000 से भी ज्यादा स्टोर होने पर भी वो उसे आसानी से मैनेज कर पाते हैं। स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस और predefined चेकलिस्ट होने के कारण उनके एम्प्लाई बदलने पर भी वो नई employee को पूरा काम चुटकियों में समझा सकते हैं जिससे उनकी क्वॉलिटी और स्टैंडर्ड कभी नहीं गिरता।

इसीलिए स्टार्ट से ही अपने बिजनेस को फ्रेंचाइजी मॉडल की तरह सिस्टम डिपेंडेंट बनाने का सोचो ना कि पीपल डिपेंडेंट बनाने का। क्योंकि लोगों का कुछ कहा नहीं जा सकता।

Work On Your Business Not In Your Business

नंबर टू वर्क ओन योर बिजनेस नोट इन और बिजनेस। लोगो का बिजनेस स्टार्ट करने का रीजन होता है। अपने लिए एक अच्छी लाइफस्टाइल क्रिएट करना लेकिन वो बिजनेस को कुछ इस तरह से बिल्ड करते है कि उनका बिजनेस पूरी तरह उनपर ही डिपेंड हो जाता है। इस बुक का सबसे बड़ा कोर प्रिंसिपल यही है कि you should work on your business not in your business.

जैसे मार्क जुकरबर्ग ने बचपन से कोडिंग स्टार्ट कर दी थी पर अगर वो फेसबुक बनाने के बाद भी कोडिंग ही करते रहते तो फेसबुक इतना इनफ्लुंसल कभी नहीं होता। इसलिए उन्होंने टेक्निकल वर्क के लिए दूसरों को हायर किया और खुद फेसबुक में काम करने की जगह फेसबुक पर काम करने लगे।

बिजनेस से फाइनेंशियल फ्रीडम पाने का एक ही तरीका है कि आप अपने आपको बिजनेस से बाहर रखें। यानी काम का पूरा बर्डन आप पर न हो बल्कि वो एक बने बनाए सिस्टम के मुताबिक चल रहा हो। सिंपल लैंग्वेज में कहें तो बिजनेस ऐसा खड़ा करें जिसमें डिसीजन और ऑपरेशन आपके बिना भी पूरी हो सके और आपको हर चीज मॉनिटर करने की जरूरत ना पड़े।

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